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Chapter Chapter 13. महात्मा गाँधी और राष्ट्रीय आन्दोलन Class 12 History Part-3 CBSE notes in hindi Long Answered Questions - CBSE Study

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Chapter Chapter 13. महात्मा गाँधी और राष्ट्रीय आन्दोलन Class 12 History Part-3 CBSE notes in hindi Long Answered Questions - CBSE Study

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Class 12 English Medium History Part-3 All Chapters:

Chapter 13. महात्मा गाँधी और राष्ट्रीय आन्दोलन

3. Long Answered Questions

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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न–उत्तर

प्रश्न 1. महात्मा गाँधी का राष्ट्रीय आंदोलन में आगमन और उसकी महत्ता स्पष्ट कीजिए।

महात्मा गाँधी 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे। भारत आने के बाद उन्होंने भारतीय राजनीति को एक नई दिशा दी। उन्होंने सत्याग्रह, अहिंसा और जनसहभागिता को राष्ट्रीय आंदोलन का आधार बनाया। गाँधीजी से पहले राष्ट्रीय आंदोलन मुख्यतः शिक्षित और शहरी वर्ग तक सीमित था, लेकिन गाँधीजी ने इसे गाँवों, किसानों, मजदूरों और आम जनता तक पहुँचाया। इससे राष्ट्रीय आंदोलन एक व्यापक जन आंदोलन बन गया।

प्रश्न 2. गाँधीजी के आंदोलन की विचारधारा का वर्णन कीजिए।

गाँधीजी की राजनीति नैतिक मूल्यों पर आधारित थी। उनका विश्वास था कि सच्चा राजनीतिक संघर्ष नैतिकता और आत्मबल पर टिका होना चाहिए। सत्य और अहिंसा उनके आंदोलन की आधारशिला थे। सत्याग्रह के माध्यम से उन्होंने अन्याय का अहिंसक विरोध किया। गाँधीजी स्वराज, स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के समर्थक थे। उनका उद्देश्य केवल राजनीतिक स्वतंत्रता प्राप्त करना नहीं, बल्कि भारतीय समाज का नैतिक और सामाजिक पुनर्निर्माण करना भी था।

प्रश्न 3. प्रारंभिक सत्याग्रह आंदोलनों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

भारत में गाँधीजी ने राष्ट्रीय आंदोलन की शुरुआत स्थानीय समस्याओं से की। 1917 का चंपारण सत्याग्रह नील की जबरन खेती और तिनकठिया प्रथा के विरोध में था, जिससे किसानों को राहत मिली और गाँधीजी को राष्ट्रीय पहचान प्राप्त हुई। 1918 में अहमदाबाद मिल हड़ताल मजदूरों के वेतन और अधिकारों के लिए की गई। इसी वर्ष खेड़ा सत्याग्रह में फसल खराब होने के बावजूद लगान वसूली का विरोध किया गया। इन आंदोलनों ने जनता में गाँधीजी के प्रति विश्वास को मजबूत किया।

प्रश्न 4. असहयोग आंदोलन (1920–22) की विशेषताएँ और महत्व लिखिए।

जलियाँवाला बाग हत्याकांड और खिलाफत आंदोलन के बाद गाँधीजी ने 1920 में असहयोग आंदोलन प्रारंभ किया। इस आंदोलन के अंतर्गत सरकारी पदों और उपाधियों का त्याग, विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार, खादी और चरखे का प्रचार तथा शिक्षण संस्थानों और न्यायालयों का बहिष्कार किया गया। यह पहला अवसर था जब राष्ट्रीय आंदोलन में किसानों, मजदूरों और छात्रों की व्यापक भागीदारी देखने को मिली। इस आंदोलन ने ब्रिटिश शासन की नींव को हिला दिया।

प्रश्न 5. सविनय अवज्ञा आंदोलन और दांडी यात्रा का महत्व स्पष्ट कीजिए।

1930 में गाँधीजी ने नमक कानून के विरोध में सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू किया। दांडी यात्रा के माध्यम से उन्होंने नमक जैसी साधारण वस्तु को राष्ट्रीय आंदोलन का प्रतीक बना दिया। 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से दांडी तक की गई यात्रा और 6 अप्रैल को नमक कानून का उल्लंघन ब्रिटिश शासन के लिए एक बड़ी चुनौती था। इस आंदोलन ने गाँव-गाँव तक स्वतंत्रता की चेतना फैलाई और औपनिवेशिक सत्ता की नैतिक वैधता पर सीधा प्रहार किया।

प्रश्न 6. गाँधीजी और सामाजिक सुधारों पर प्रकाश डालिए।

गाँधीजी का आंदोलन केवल अंग्रेजों के विरुद्ध नहीं था, बल्कि सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध भी था। उन्होंने छुआछूत का विरोध किया और हरिजन आंदोलन चलाया। महिलाओं को राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल किया। खादी, स्वदेशी और ग्राम स्वराज के माध्यम से उन्होंने आत्मनिर्भर और समतामूलक समाज की कल्पना की। गाँधीजी मानते थे कि सामाजिक एकता के बिना स्वतंत्रता अधूरी है।

प्रश्न 7. भारत छोड़ो आंदोलन (1942) और उसके महत्व का वर्णन कीजिए।

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 1942 में गाँधीजी ने भारत छोड़ो आंदोलन का आह्वान किया। उन्होंने “करो या मरो” का नारा दिया और तत्काल स्वतंत्रता की माँग की। इस आंदोलन में व्यापक जनभागीदारी देखने को मिली। यद्यपि गाँधीजी और अन्य नेता गिरफ्तार कर लिए गए, फिर भी आंदोलन पूरे देश में फैल गया। इस आंदोलन ने स्पष्ट कर दिया कि ब्रिटिश शासन अब भारत में अधिक समय तक नहीं टिक सकता।

प्रश्न 8. महात्मा गाँधी का राष्ट्रीय आंदोलन में महत्व स्पष्ट कीजिए।

महात्मा गाँधी ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को जन आंदोलन में परिवर्तित किया। उन्होंने किसानों, मजदूरों, महिलाओं और दलितों को आंदोलन से जोड़ा। राजनीति को नैतिकता से जोड़कर उन्होंने स्वतंत्रता संघर्ष को नई दिशा दी। गाँधीजी के नेतृत्व में राष्ट्रीय आंदोलन न केवल स्वतंत्रता प्राप्ति का साधन बना, बल्कि भारतीय समाज के व्यापक परिवर्तन का माध्यम भी बना।

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