Chapter 7. संघवाद Class 11 Political Science CBSE notes in hindi राज्यों की स्वायत्तता की माँग - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 11 English Medium Political Science All Chapters:
7. संघवाद
2. राज्यों की स्वायत्तता की माँग
केंद्र और राज्य के बीच सम्बन्ध :
1950 के बाद नए राज्यों की गठन की माँग के अलावा केंद्र और राज्यों के बीच संबंध शांतिपूर्ण और समान्य रहे | राज्यों को आशा थी कि वे केंद्र से प्राप्त वित्तीय अनुदान से वे अपने राज्य में विकास कर सकेंगे | 1960 के दशक के बाद जब कांग्रेस का वर्चस्व धीरे-धीरे समाप्त होने लगा और राज्यों में अन्य दलों की सरकारें गठित होने लगी तो उन सरकारों ने केंद्र की कांग्रेस सरकार की राज्यों के मामलों में बेमतलब हस्तक्षेप का विरोध शुरू कर दिया और अब केंद्र द्वारा राज्यों से तालमेल पहले जैसा आसान नहीं रहा | और धीरे-धीरे संघीय व्यवस्था में राज्यों की स्वायत्तता की अवधारणा को लेकर वाद-विवाद छिड़ गया |
1990 के दशक के बाद जब देश में गठबंधन की सरकारों का युग चला तो केंद्र में क्षेत्रीय दलों का वर्चस्व भी बढ़ गया और और वे सत्तारूढ़ भी हुए | इससे राज्यों का राजनितिक कद बढ़ा, विविधता का आदर हुआ और एक स्वच्छ और मँजे हुए संघवाद की शुरुआत हुई | राज्यों की स्वायत्तता की मांग बढ़ने लगी |
केंद्र और राज्यों के बीच विवाद/ मतभेद :
भारत ने शासन व्यवस्था संघात्मक है परन्तु एकात्मक शासन के साथ-साथ संघात्मक भी है | ऐसी स्थिति में केंद्र और राज्यों के बीच विभिन्न मुद्दों पर विवाद होते रहते है : ये मुद्दे कुछ इस प्रकार है |
(i) राज्यों को और स्वायतता को लेकर
(ii) राज्य के मामलों में केन्द्रीय हस्तक्षेप की लेकर |
(iii) राज्य सूची में शामिल कानूनों को लेकर जब केंद्र उस विषय पर कोई कानून बना रहा हो |
(iv) राज्यों के लिए विशेष पैकेज की माँग को लेकर अथवा किसी राज्य को विशेष दर्जा को लेकर |
जम्मू कश्मीर अन्य राज्यों से कैसे अलग है ?
(i) राज्य सरकार के सहमती के बिना जम्मू-कश्मीर में 'आंतरिक अशांति' के आधार पर 'आपातकाल' लागु नहीं किया जा सकता |
(ii) संघ सरकार जम्मू-कश्मीर में वित्तीय आपातस्थित लागु नहीं कर सकती
(iii) राज्य के निति निर्देशक तत्व यहाँ लागु नहीं किये जा सकते |
(iv) भारतीय संविधान के संशोधन अनुच्छेद 368 के अंतर्गत राज्य सरकार की सहमति से ही जम्मू-कश्मीर में लागू हो सकता है |