Chapter 5. विधायिका Class 11 Political Science CBSE notes in hindi कार्यपालिका पर संसद का नियंत्रण - CBSE Study
कक्षा 11 Political Science के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण 5. विधायिका को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक कार्यपालिका पर संसद का नियंत्रण को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन Political Science में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।
CBSE NOTES:
Class 11 English Medium Political Science All Chapters:
5. विधायिका
3. कार्यपालिका पर संसद का नियंत्रण
अविश्वास प्रस्ताव :
जब कोई सरकार या कार्यपालिका लोकसभा में अपना बहुमत खो देती है तो विपक्ष या उसके नेता सदन में एक प्रस्ताव लाते है जिसमें सरकार को अल्पमत की सरकार बताया जाता है और उसे फिर से सदन में अपनी बहुमत दिखाने को कहा जाता है | इस प्रस्ताव को अविश्वास प्रस्ताव कहा जाता है | बहुत सी सरकारें अविश्वास प्रस्ताव के कारण गिर चुकी है |
- अविश्वास प्रस्ताव संसद द्वारा कार्यपालिका को उतरदायी बनाने का सबसे सशक्त हथियार है |
- यह तभी संभव है जब सरकार लोकसभा में अल्पमत हो अन्यथा यह कल्पना मात्र हैं |
संसदीय समितियाँ :
समिति एक छोटी संख्या है जिसे विशेष कार्य सौपा जाता है ये विभिन्न मामलों पर विचार विमर्श करती हैं और प्रशासनिक कार्यों पर निगरानी रखती है |
1. वित्तीय समितियाँ :
(i) लोक लेखा समिति : भारत सरकार के विभिन्न विभागों का खर्च नियमानुसार हुआ है या नहीं इसका लेखा जोखा रखती है |
(ii) प्राकलन समिति : खर्च में किफ़ायत किस तरह की जा सकती है |
(iii) लोक उपक्रम समिति: सरकारी उद्योगों की रिपोर्ट की जाँच करती है कि उद्योग का व्यवसाय कुशलता पूर्वक चलाये जा रहे है या नहीं |
2. विभागीय स्थायी समितियाँ : यह कृषि, वाणिज्य उद्योग, गृह मंत्रालय इत्यादि संबंधित विधेयकों की देखरेख करती है |
3. संयुक्त संसदीय समितियाँ : इन समितियों में संसद के दोनों सदनों के सदस्य होते हैं | संयुक्त संसदीय समितियों का गठन किसी विधेयक पर संयुक्त चर्चा अथवा वित्तीय अनिमियतताओं की जाँच के लिए किया जा सकता है |
दलबदल : यदि कोई सदस्य अपने दल के नेतृत्व के आदेश के बावजूद सदन में उपस्थित न हो या दल के निर्देश के विपरीत सदन में मतदान करे अथवा स्वेच्छा से दल की सदस्यता दे दे तो उसे दलबदल कहते है |
दलबदल निरोधक कानून : संविधान के 52 वाँ संशोधन द्वारा सन 1985 में एक कानून बनाया गया जिसके द्वारा सदन का अध्यक्ष अपने सदस्यों के व्यवहार को नियंत्रित करता है | इसे दलबदल निरोधक कानून कहते है | यदि यह सिद्ध हो जाये कि कोई सदस्य ने दलबदल किया है तो उसकी सदन की सदस्यता समाप्त हो जाती है | उअर ऐसे दलबदलू को किसी भी राजनितिक पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाता है |