Chapter 4. कार्यपालिका Class 11 Political Science CBSE notes in hindi राज्य कार्यपालिका - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 11 English Medium Political Science All Chapters:
4. कार्यपालिका
3. राज्य कार्यपालिका
मुख्यमंत्री:
मुख्यमंत्री राज्य कार्यपालिका के मंत्रिपरिषद का प्रमुख होता है | मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करता है तथा अन्य मंत्रियों की नियुक्ति मुख्यमंत्री की सलाह पर राज्यपाल द्वारा किया जाता है | विधानसभा में जिस दल का बहुमत होता है उस दल के नेता को मुख्यमंत्री बनाया जाता है | इसका कार्यकाल 5 वर्ष का होता है |
मुख्यमंत्री का कार्य एवं शक्तियाँ:
(i) मुख्यमंत्री राज्यपाल और मंत्रिपरिषद के बीच कड़ी का कार्य करता है |
(ii) वह मंत्रिपरिषद के सभी निर्णयों की जानकारी राज्यपाल तक पहुँचाता है |
(iii) मुख्यमंत्री को अपना सहयोगी मंत्रियों को चुनने की आजादी होती है |
(iv) वह किसी भी मंत्री को त्यागपत्र देने के लिए कह सकता है |
(v) मुख्यमंत्री राज्य विधान सभा का नेता होता है |
(vi) प्रशासन संबंधी ऐसी जानकारी जो राज्यपाल मांगता है उसे प्रस्तुत करना पड़ता है |
राज्यपाल :
किसी राज्य के राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा की जाती है | वह राज्य कार्यपालिका का अध्यक्ष होता है | यह एक ऐसा व्यक्ति होना चाहिए जिसके पास सार्वजानिक जीवन का तथा प्रशासन का लंबा अनुभव हो जिस पर यह विश्वास किया जा सके कि वह पार्टी निष्ठाओं से ऊपर उठकर कार्य करेगा | एक व्यक्ति को दो या दो से अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया जा सकता है |
राज्यपाल का कार्य एवं शक्तियाँ:
(i) वह राज्य सरकार के संवैधानिक अध्यक्ष के रूप में तथा केंद्र सरकार के एजेंट के रूप में कार्य करता है |
(ii) वह मुख्यमंत्री की नियुक्ति करता है और मुख्यमंत्री के सलाह पर राज्य के अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करता है |
(iii) वह बहुमत दल के नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करता है |
(iv) सरकार के सभी काम राज्यपाल के नाम पर ही किया जाता है |
(v) वह उच्च न्यायालयों के न्यायधीशों की नियुक्ति करता है और राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्यों की नियुक्ति करता है |
(vi) राज्यपाल राज्य विधानमंडल के अधिवेशन को बुलाता है और अधिवेशन स्थगित करता है तथा विधानसभा को भंग करता है |
(vii) वह विधेयक को स्वीकृति देता है |
(viii) कोई भी धन विधेयक राज्यपाल के अनुमति के बिना पेश नहीं किया जा सकता |
(ix) राज्य के क्षेत्राधिकार में आने वाले सभी मामलों में वह किसी अपराध में दण्डित व्यक्ति को क्षमा दान दे सकता है |
नौकरशाही :
नौकरशाही को स्थायी कार्यपालिका भी कहा जाता है क्योंकि प्रशासनिक सेवा द्वारा इनकी नियुक्ति स्थायी रूप से किया जाता है | ये जनता के द्वारा चुने नहीं जाते है |
सिविल सेवा अर्थात नौकरशाहों की भूमिका निम्नलिखित हैं |
(i) सिविल सेवाएँ सरकारी निति निर्माण में मंत्रिपरिषद को सलाह देते है और समस्याओं का विश्लेषण करते है |
(ii) ये प्रशासनिक कार्य को सँभालते है और नीतियों को शीघ्रता से लागु करते है |
(iii) ये विकासात्मक भूमिका निभाते है और जनकल्याण के कार्यों को आगे बढ़ाते हैं |
(iv) ये पंचवर्षीय योजनाओं को लागु एवं पूरा करवाने में सरकार की मदद करते हैं |
भारत में निर्वाचित प्रशासन :