Chapter 9. शांति Class 11 Political Science-II CBSE notes in hindi हिंसा के विभिन्न रूप - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 11 English Medium Political Science-II All Chapters:
9. शांति
2. हिंसा के विभिन्न रूप
हिंसा के विभन्न रूप या प्रकार:-
1. जातीय दंगे :- भारत में छुआछूत कि समाप्ति के साथ ही जाती प्रथा से जुड़े बहुत से विशेषाधिकार एक-2 करके लुप्त हो गए बाद में जमीदारी उन्मूलन किए जाने से मंझोली जातियों के किसान भी इतने सब हो गए कि वे जो पहले दबंग जातीय होती थी ,उनके नेत्व्य को चुनौती देने लगे!
2.नस्लवाद :-नस्लवाद के मूल में यह भावना रही है कि कुछ जातिया या नसले प्रकृति से ही श्रेष्ठ है और उन्हें अन्य नस्लों को दबाकर रखने का पूरा अधिकार है नस्लवाद जर्मनी में नाजीवाद और दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद कि नीति के रूप प्रकट हुआ
3.लिंग आधारित हिंसा :- पुरे विश्व में विशेषकर मुस्लिम समुदायों में महिलाओ कि सामाजिक आथिक विश्व समुदाय के समक्ष एक महाभीशण सर्वनाश के रूप में सामने आया
हिंसा को समाप्त करने के तरीके :- सयुक्त राष्ट्र शेक्षणिक वैज्ञानिक संगठन कि स्थापना का उद्देश्य शिक्षा,विज्ञान,संस्कृति और संचार व्यवस्था के विकास द्वारा राष्ट्रों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना और विश्व में शांति वा सुरक्षा स्थापित करना क्योंकि युद्ध मानव के मस्तिस्क में शांति कि अवधारणा विकसित होनी चाहिए
आतंकवादी गतिविधिया :- अन्तर्राष्ट्रीय आतंकवाद को फैलाने में लीबिया सूडान और अफगानिस्तान कि भूमिका से निबतेन के लिए विश्व समुदाय द्वारा अलग अलग तरीके अपनाएं गए है अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेन्टर पर 11 सितम्बर को हुआ हमला आज तक कि सबसे अधिक विनाशकारी आतंकवादी घटना थी सयुंक्त राष्ट्र संघ सुरक्षा परिषद ने आतंकवादियो के विरुध अभियान में सभी देशो को पूरी तरह से सहयोग देने कि अपील कि
शांति और राज्यसत्ता :- हमारे समाज में सुव्यवस्था और सामंजस्य स्थापित करने के लिए एक शक्तितंत्र कि आवश्कता है जिसे राज्य कहते है|आधुनिक राज्य अनेक कार्य करता है राज नागरिको कि जीवन और उनकी सम्पति कि रक्षा करता है प्रकृति आपदाओ कि स्तिथि में लोगो को राहत प्रदान करता है,विदेशी आक्रमण के दोरान नागरिको के जान-माल की ओर राष्ट्र के सम्मान की रक्षा करता है तथा कला ओर विज्ञान की प्रगति व लोगो के भौतिक कल्याण के लिए उचित अवसर जुटाता है |
शांतिवाद : शांतिवाद विवादों को सुलझाने के औजार के बतौर युद्ध या हिंसा के बजाय शांति का उपदेश देता है।
शांतिवाद की विशेषताएँ :
(i) इसमें विचारों की अनेक छवियाँ शामिल हैं।
(ii) इसके दायरे में कूटनीति को अंतर्राष्ट्रीय विवादों का समाधान करने में प्राथमिकता देने से लेकर किसी भी हालत में हिंसा और ताकत के इस्तेमाल के पूर्ण निषेध तक आते हैं।
(iii) शांतिवाद सिद्धांतों पर भी आधारित हो सकता है और व्यवहारिकता पर भी।
(iv) यह युद्ध को उचित नहीं ठहरता है और किसी भी जोर-जबरदस्ती को नैतिक रूप से गलत मानता है |
शांतिवाद के भेद :
(1) सैद्धांतिक शांतिवाद : सैद्धांतिक शांतिवाद का जन्म इस विश्वास से होता है कि युद्ध, सुविचारित घातक हथियार, हिंसा या किसी प्रकार की जोर-जबरदस्ती नैतिक रूप से गलत है।
(2) व्यावहारिक शांतिवाद : व्यावहारिक शांतिवाद ऐसे किसी चरम सिद्धांत का अनुसरण नहीं करता है। यह मानता है कि विवादों के समाधान में युद्ध से बेहतर तरीके भी हैं या फिर यह समझता है कि युद्ध पर लागत ज्यादा आती है, और फायदे कम होते हैं।