Chapter 3. समानता Class 11 Political Science-II CBSE notes in hindi समानता का महत्व - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 11 English Medium Political Science-II All Chapters:
3. समानता
2. समानता का महत्व
अध्याय 3. समानता
समानता का महत्त्व :
(i) स्वतंत्रता के लिए समानता का होना आवश्यक है |
(ii) समानता होने से कोई नागरिकों के बीच जाति, धर्म, भाषा, वंश, रंग और लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं करता है |
(iii) सामाजिक न्याय और सामाजिक स्वतंत्रता पाने के लिए समानता होना बहुत ही जरुरी है |
(iv) लोकतंत्र में अच्छी कानून के शासन के लिए समानता आवश्यक है अन्यथा लोकतंत्र का कोई मूल्य नहीं है |
(v) मौलिक अधिकारों कि सार्थकता भी समानता से ही है |
(vi) सभी के विकास के लिए समानता होना अति आवश्यक है |
समानता की विशेषताएँ :
(i) समानता के होने से विशेषाधिकारों की अनुपस्थिति हो जाती है |
(ii) सभी को विकास के सामान अवसर मिलते हैं |
(iii) न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति के अवसर प्राप्त होते हैं |
(iv) तर्क संगत भेदभाव की उपयुक्तता बढ़ जाती है |
(v) सामानों में समानता और असमानों में असमानता संभव हो पाता है |
उदारवादी समानता के तत्व:
(1) व्यक्तियों को उनकी योग्यतानुसार पुरस्कार देना |
(2) प्रतियोगिता का सिद्धांत अपनाना |
(3) प्रत्येक व्यक्ति के लिए न्यूनतम जीवन स्तर की गारंटी |
मार्क्सवादी समानता के तत्व :
(1) उत्पादन व वितरण के साधनों पर सरकार का नियंत्रण
(2) सभी को विकास के सामान अवसर प्रदान करना |
राजनितिक समानता स्थापित करने के उपाय :
(1) सबके लिए आर्थिक समानता |
(2) राजनितिक शिक्षा का प्रसार |
(3) कानून का शासन हो |
(4) प्रेस की स्वतंत्रता हो |
(5) लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था हो |
(6) सार्वभौमिक व्यस्क मताधिकार का प्रयोग हो |
आर्थिक समानता स्थापित करने के उपाय :
(1) धन का न्यायोचित वितरण
(2) उत्पादन के साधनों पर नियंत्रण
(3) सिमित सम्पति का अधिकार
(4) आर्थिक सुरक्षा
(5) समान काम के लिए समान वेतन व्यवस्था |
भारत सरकार द्वारा सामाजिक समानता के लिए किए गए उपाय :
(1) कानून के समक्ष समानता (अनुo 14) |
(2) अस्पृश्यता का अंत (अनुo 17) |
(3) संसद तथा विधानसभाओं में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण का प्रावधान |
(4) सरकारी सेवाओं में एससी, इसटी, और ओबीसी का आरक्षण |
(5) स्थानीय शासन में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण (अनुo 73-74) |
समानता को प्रोत्साहित करने के उपाय :
(i) संविधान : समानता को स्थापित करने में संविधान का बहुत बड़ा महत्त्व है | संविधान के द्वारा समानता को प्रोत्साहित किया जा सकता है |
(ii) कानून का शासन : कानून का शासन स्थापित कर समानता को बढाया जा सकता है | क्योंकि कानून का शासन का अर्थ ही है सबके लिए समान कानून और कानून के लिए सभी बराबर हैं |
(iii) शक्तियों का विकेंद्रीकरण : समानता को स्थापित करने के लिए की सत्ता शक्तियों का विकेंद्रीकरण होना चाहिए | इसमें सभी राज्य के सभी लोगों, समूहों की भागीदारी होनी चाहिए |
(iv) स्वतंत्र प्रेस : न्याय की समानता के लिए प्रेस की स्वतंत्रता बहुत ही आवश्यक है | विचारों को स्वतंत्रतापूर्वक अभिव्यक्त करने के लिए स्वतंत्र प्रेस हो |
समाजवाद :
वह व्यवस्था जिसमें कोई राज्य का शासन का उदेश्य व्यक्तिगत अथवा कुछ व्यक्तियों तक सिमित न होकर समस्त समाज का कल्याण करना हो और राज्य की सभी नीतियाँ समाज कल्याण के उदेश्य से ही बनाई जाती हो | तो उसे समाजवाद कहते हैं |
समाजवाद की विशेषताएँ :
(i) इसका उदेश्य वर्त्तमान असमानताओं को न्यूनतम करना और संसाधनों का न्यायपूर्ण बँटवारा है |
(ii) वे शिक्षा एवं स्वास्थ्य जैसे आधारभूत क्षेत्रों में सरकारी नियमन, नियोजन और नियंत्रण का समर्थन करते हैं |
(iii) राज्य की नीतियाँ समाज कल्याण के उदेश्य से बनाई जाती है |
(iv) ये समाज में सभी प्रकार के समानताओं को बढ़ावा देते है |
प्रमुख समाजवादी चिंतक राम मनोहर लोहिया द्वारा चिन्हित पांच असमानताएँ :
(i) स्त्री-पुरुष असमानता
(ii) चमड़ी के रंग पर आधारित असमानता
(iii) जातिगत असमानता
(iv) कुछ देशों का अन्य देशों पर औपनिवेशिक शासन
(v) आर्थिक असमानता