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Chapter 3. समानता Class 11 Political Science-II CBSE notes in hindi समानता का महत्व - CBSE Study

Chapter 3. समानता Political Science-II Class 11 cbse notes समानता का महत्व in hindi, all chapters and exercises are covered the ncert latest syllabus 2026 - 27.

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Chapter 3. समानता Class 11 Political Science-II CBSE notes in hindi समानता का महत्व - CBSE Study

कक्षा 11 Political Science-II के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण 3. समानता को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक समानता का महत्व को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन Political Science-II में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।

Class 11 English Medium Political Science-II All Chapters:

3. समानता

2. समानता का महत्व

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अध्याय 3. समानता 


समानता का महत्त्व : 

(i) स्वतंत्रता के लिए समानता का होना आवश्यक है |

(ii) समानता होने से कोई नागरिकों के बीच जाति, धर्म, भाषा, वंश, रंग और लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं करता है | 

(iii) सामाजिक न्याय और सामाजिक स्वतंत्रता पाने के लिए समानता होना बहुत ही जरुरी है | 

(iv) लोकतंत्र में अच्छी कानून के शासन के लिए समानता आवश्यक है अन्यथा लोकतंत्र का कोई मूल्य नहीं है |

(v) मौलिक अधिकारों कि सार्थकता भी समानता से ही है | 

(vi) सभी के विकास के लिए समानता होना अति आवश्यक है | 

समानता की विशेषताएँ : 

(i) समानता के होने से विशेषाधिकारों की अनुपस्थिति हो जाती है | 

(ii) सभी को विकास के सामान अवसर मिलते हैं |

(iii) न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति के अवसर प्राप्त होते हैं | 

(iv) तर्क संगत भेदभाव की उपयुक्तता बढ़ जाती है | 

(v) सामानों में समानता और असमानों में असमानता संभव हो पाता है | 

उदारवादी समानता के तत्व:

(1) व्यक्तियों को उनकी योग्यतानुसार पुरस्कार देना |

(2) प्रतियोगिता का सिद्धांत अपनाना |

(3) प्रत्येक व्यक्ति के लिए न्यूनतम जीवन स्तर की गारंटी | 

मार्क्सवादी समानता के तत्व : 

(1) उत्पादन व वितरण के साधनों पर सरकार का नियंत्रण 

(2) सभी को विकास के सामान अवसर प्रदान करना | 

राजनितिक समानता स्थापित करने के उपाय : 

(1) सबके लिए आर्थिक समानता |

(2) राजनितिक शिक्षा का प्रसार | 

(3) कानून का शासन हो |

(4) प्रेस की स्वतंत्रता हो |

(5) लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था हो | 

(6) सार्वभौमिक व्यस्क मताधिकार का प्रयोग हो | 

आर्थिक समानता स्थापित करने के उपाय : 

(1) धन का न्यायोचित वितरण 

(2) उत्पादन के साधनों पर नियंत्रण 

(3) सिमित सम्पति का अधिकार 

(4) आर्थिक सुरक्षा 

(5) समान काम के लिए समान वेतन व्यवस्था |  

 भारत सरकार द्वारा सामाजिक समानता के लिए किए गए उपाय : 

(1) कानून के समक्ष समानता (अनुo 14) |

(2) अस्पृश्यता का अंत (अनुo 17) |

(3) संसद तथा विधानसभाओं में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण का प्रावधान | 

(4) सरकारी सेवाओं में एससी, इसटी, और ओबीसी का आरक्षण |

(5) स्थानीय शासन में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण (अनुo 73-74) |

समानता को प्रोत्साहित करने के उपाय :

(i) संविधान : समानता को स्थापित करने में संविधान का बहुत बड़ा महत्त्व है | संविधान के द्वारा समानता को प्रोत्साहित किया जा सकता है |

(ii) कानून का शासन : कानून का शासन स्थापित कर समानता को बढाया जा सकता है | क्योंकि कानून का शासन का अर्थ ही है सबके लिए समान कानून और कानून के लिए सभी बराबर हैं | 

(iii) शक्तियों का विकेंद्रीकरण : समानता को स्थापित करने के लिए की सत्ता शक्तियों का विकेंद्रीकरण होना चाहिए | इसमें सभी राज्य के सभी लोगों, समूहों की भागीदारी होनी चाहिए |

(iv) स्वतंत्र प्रेस : न्याय की समानता के लिए प्रेस की स्वतंत्रता बहुत ही आवश्यक है | विचारों को स्वतंत्रतापूर्वक अभिव्यक्त करने के लिए स्वतंत्र प्रेस हो |  

समाजवाद : 

वह व्यवस्था जिसमें कोई राज्य का शासन का उदेश्य व्यक्तिगत अथवा कुछ व्यक्तियों तक सिमित न होकर समस्त समाज का कल्याण करना हो और राज्य की सभी नीतियाँ समाज कल्याण के उदेश्य से ही बनाई जाती हो | तो उसे समाजवाद कहते हैं | 

समाजवाद  की विशेषताएँ : 

(i) इसका उदेश्य वर्त्तमान असमानताओं को न्यूनतम करना और संसाधनों का न्यायपूर्ण बँटवारा है |

(ii) वे शिक्षा एवं स्वास्थ्य जैसे आधारभूत क्षेत्रों में सरकारी नियमन, नियोजन और नियंत्रण का समर्थन करते हैं |

(iii) राज्य की नीतियाँ समाज कल्याण के उदेश्य से बनाई जाती है | 

(iv) ये समाज में सभी प्रकार के समानताओं को बढ़ावा देते है | 

प्रमुख समाजवादी चिंतक राम मनोहर लोहिया द्वारा चिन्हित पांच असमानताएँ : 

(i) स्त्री-पुरुष असमानता 

(ii) चमड़ी के रंग पर आधारित असमानता 

(iii) जातिगत असमानता 

(iv) कुछ देशों का अन्य देशों पर औपनिवेशिक शासन 

(v) आर्थिक असमानता 

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