Chapter 1. राजनीतिक सिद्धांत - एक परिचय Class 11 Political Science-II CBSE notes in hindi राजनितिक के प्रति मिथ्या धारणा - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 11 English Medium Political Science-II All Chapters:
1. राजनीतिक सिद्धांत - एक परिचय
2. राजनितिक के प्रति मिथ्या धारणा
अध्याय 1. राजनितिक सिद्धांत
राजनितिक के प्रति मिथ्या धारणा :
(i) राजनीति से जुडे़ अन्य लोग राजनीति को दावपेंच से जोड़ते हैं तथा आवश्यकताओं और
महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के कुचक्र में लगे रहते हैं।
(ii) कुछ लोग राजनेताओं को दल-बदल करते, झूठे वायदे करते या बढ़ा-चढ़ा कर दावे करते, विभिन्न तबकों से जोड़-तोड़ करते, निजी स्वार्थ साधते और धृणित रूप में हिंसा करते देखते है तो वे इसे ही राजनीति समझ बैठते है |
(iii) कुछ लोग भ्रष्टाचार, लुट और घोटालों को ही राजनीति समझ लेते है, वे कहते है घोटाले करो देश को लूटो यही राजनीति है |
(iv) जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में जब हम हर संभव तरीके से अपने स्वार्थ को साधने में लगे लोगों को देखते हैं, तो हम कहते हैं कि वे राजनीति कर रहे हैं। यदि हम एक क्रिकेटर को टीम में बने रहने के लिए जोड़तोड़ करते या किसी सहपाठी को अपने पिता की हैसियत का उपयोग करते अथवा दफ्तर में किसी सहकर्मी को बिना सोचे-समझे बॉस की हाँ में हाँ मिलाते देखते हैं, तो हम कहते हैं कि वह ‘गंदी’ राजनीति कर रहा है।
राजनीति किसी भी समाज का महत्वपूर्ण और अविभाज्य अंग है :
हमारे जीवन से जुडी प्रत्येक गतिविधियाँ राजनीति से जुडी होती हैं | बेहतर समाज एवं दुनियां को बनाने के लिए हमें राजनीति में निश्चित ही शामिल होना चाहिए | क्योंकि राजनीति किसी भी समाज का महत्वपूर्ण और अविभाज्य अंग है |
समानता का अधिकार सभी को समान अवसर प्रदान नहीं करता:
अवसर: अवसर एक ऐसी स्थिति है आपके लिए कुछ ऐसा करना संभव करती है जिसे आप करना चाहते हैं |
परन्तु सभी प्रदान अवसर लाभजनक नहीं होते, इन अवसरों को प्राप्त करने में कुछ कठिनाइयाँ होती हैं | उदाहरण के लिए कानून के समक्ष सभी को समानता का अधिकार मिला है | लेकिन ये समानता तभी संभव हो पाती है जब हमारे पास कानून से प्राप्त समानता को प्राप्त करने के लिए पर्याप्त संसाधन हो | हम सभी जानते है कि कानून से न्याय पाने के लिए हमें अदालती खर्चे एवं वकीलों की भारी-भरकम रकम चुकानी पड़ती है | यदि हमारे पास पर्याप्त रकम नहीं है तो हम कई बार न्याय पाने में पिछड़ जाते है | यही कारण है कि समानता का अधिकार सभी को समान अवसर प्रदान नहीं करता है |
लोकतंत्र के सफल संचालन के लिए राजनितिक सिद्धांत की आवश्यकता:
(i) लोकतंत्र में नागरिकों को जागरूक होना बहुत ही आवश्यक है, इस प्रकार की जागरूकता का ज्ञान हमें राजनितिक सिद्धांत से प्राप्त होता है |
(ii) लोकतंत्र समानता, स्वतंत्रता और न्याय के सिद्धांत पर टिका होता है जो राजनीति के उदारवादी दृष्टिकोण पर आधारित है |
(iii) राजनितिक सिद्धांत उन विचारों और नीतियों को व्यवस्थित रूप को प्रतिबिंबित करता है, जिनसे हमारे सामाजिक जीवन, सरकार और संविधान ने आकार ग्रहण किया है |
(iv) लोकतंत्र में राजनितिक सिद्धांत कानून का राज, अधिकारों का बँटवारा और न्यायिक पुनरवलोकन जैसी नीतियों कि सार्थकता कि जाँच करता है |
(v) राजनितिक सिद्धांत पूर्व के और वर्तमान के विचारकों के विचारों एवं सिद्धांतो के आधार पर आधारित होता है जिनके आधार पर संवैधानिक दस्तावेजों की उत्पति हुई है | इन दस्तावेजों के आधार पर ही आजकल लोकतंत्र का सफल संचालन हो रहा है |
राजनीति से संबंधित महात्मा गाँधी के विचार:
महात्मा गाँधी ने एक बार टिप्पणी की थी कि राजनीति ने हमें साँप की कुंडली की तरह जकड रखा है और इसे जूझने के सिवाय कोई अन्य रास्ता नहीं है |