Chapter Chapter 10. मूल निवासियों का विस्थापन Class 11 History CBSE notes in hindi मूल निवासियों का परिचय - CBSE Study
कक्षा 11 History के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण Chapter 10. मूल निवासियों का विस्थापन को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक मूल निवासियों का परिचय को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन History में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।
CBSE NOTES:
Class 11 English Medium History All Chapters:
Chapter 10. मूल निवासियों का विस्थापन
1. मूल निवासियों का परिचय
अध्याय 10. मूल निवासियों का विस्थापन (Part 1)
अध्याय परिचय : उन्नीसवीं शताब्दी में अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में यूरोपीय उपनिवेशवाद के विस्तार के कारण वहाँ के मूल निवासियों (Native People) को अपनी भूमि, संस्कृति और पारंपरिक जीवन से वंचित होना पड़ा। यूरोपीय लोगों ने विशाल भू-भागों पर अधिकार स्थापित किया, जिसके परिणामस्वरूप मूल निवासियों का व्यापक विस्थापन हुआ। इस अध्याय में यूरोपीय विस्तार, मूल निवासियों के जीवन, उनकी संस्कृति तथा विस्थापन के प्रारम्भिक कारणों का अध्ययन किया गया है।
अध्याय के मुख्य बिंदु
इस अध्याय में अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासियों के जीवन, यूरोपीय उपनिवेशवाद, भूमि पर अधिकार तथा विस्थापन की प्रक्रिया का अध्ययन किया गया है।
- यूरोपीय लोगों ने नए क्षेत्रों पर अधिकार स्थापित किया।
- मूल निवासियों को उनकी भूमि से बेदखल किया गया।
- पारंपरिक जीवन शैली प्रभावित हुई।
- उपनिवेशवाद के कारण सांस्कृतिक परिवर्तन हुए।
- मूल निवासियों के अधिकारों का हनन हुआ।
मूल निवासी (Native People)
मूल निवासियों का परिचय
मूल निवासी वे लोग थे जो किसी क्षेत्र में बाहरी लोगों के आने से पहले से निवास कर रहे थे। अमेरिका में इन्हें रेड इंडियन (Native Americans) तथा ऑस्ट्रेलिया में एबोरिजिनल (Aboriginals) कहा जाता है।
मूल निवासियों की प्रमुख विशेषताएँ
- प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन।
- सामुदायिक भूमि व्यवस्था।
- शिकार, मछली पकड़ना और कृषि पर निर्भरता।
- विशिष्ट भाषा और संस्कृति।
- जनजातीय सामाजिक व्यवस्था।
यूरोपीय लोगों का आगमन
नए क्षेत्रों की खोज
पंद्रहवीं और सोलहवीं शताब्दी से यूरोपीय देशों ने नए क्षेत्रों की खोज प्रारम्भ की। धीरे-धीरे इंग्लैंड, फ्रांस, स्पेन और अन्य यूरोपीय देशों के लोग अमेरिका तथा ऑस्ट्रेलिया में बसने लगे।
इनका मुख्य उद्देश्य भूमि प्राप्त करना, व्यापार का विस्तार करना तथा प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकार स्थापित करना था।
यूरोपीय आगमन के प्रमुख उद्देश्य
- नई भूमि प्राप्त करना।
- प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकार।
- व्यापार का विस्तार।
- उपनिवेशों की स्थापना।
- ईसाई धर्म का प्रचार।
अमेरिका के मूल निवासी
रेड इंडियन समुदाय
अमेरिका के मूल निवासी अनेक जनजातियों में विभाजित थे। प्रत्येक जनजाति की अपनी भाषा, संस्कृति, परंपराएँ और जीवन शैली थी। वे जंगलों, घास के मैदानों तथा नदियों के आसपास निवास करते थे।
अमेरिकी मूल निवासियों का जीवन
- शिकार और मछली पकड़ना प्रमुख व्यवसाय था।
- कुछ जनजातियाँ कृषि भी करती थीं।
- प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग करती थीं।
- जनजातीय परिषद द्वारा निर्णय लिए जाते थे।
- सामुदायिक जीवन को महत्व दिया जाता था।
ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासी
एबोरिजिनल समुदाय
ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासियों को एबोरिजिनल कहा जाता है। वे हजारों वर्षों से ऑस्ट्रेलिया में निवास कर रहे थे। उनका जीवन प्रकृति, शिकार, संग्रह तथा पारंपरिक ज्ञान पर आधारित था।
एबोरिजिनल समाज की प्रमुख विशेषताएँ
- घुमंतू जीवन शैली।
- शिकार एवं संग्रह पर निर्भरता।
- प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण।
- जनजातीय संस्कृति का विकास।
- मौखिक परंपराओं का महत्व।
भूमि का महत्व
भूमि और जीवन का संबंध
मूल निवासियों के लिए भूमि केवल आजीविका का साधन नहीं थी, बल्कि उनकी संस्कृति, धार्मिक आस्था और सामाजिक पहचान का आधार भी थी। वे भूमि को निजी संपत्ति नहीं बल्कि सामुदायिक धरोहर मानते थे।
भूमि का महत्व
- आजीविका का प्रमुख स्रोत।
- सांस्कृतिक पहचान का आधार।
- धार्मिक आस्था से जुड़ी हुई।
- सामुदायिक स्वामित्व की भावना।
- प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण।
यूरोपीय भूमि नीति
निजी स्वामित्व की अवधारणा
यूरोपीय लोग भूमि को निजी संपत्ति मानते थे। उन्होंने विशाल क्षेत्रों पर अधिकार स्थापित किया तथा मूल निवासियों की पारंपरिक भूमि व्यवस्था को समाप्त करना प्रारम्भ कर दिया।
यही नीति आगे चलकर मूल निवासियों के विस्थापन का प्रमुख कारण बनी।
यूरोपीय भूमि नीति की विशेषताएँ
- निजी भूमि स्वामित्व।
- बड़े कृषि फार्मों की स्थापना।
- स्थानीय लोगों को भूमि से बेदखल करना।
- व्यावसायिक कृषि को बढ़ावा।
विस्थापन की शुरुआत
मूल निवासियों पर प्रभाव
यूरोपीय लोगों द्वारा भूमि पर अधिकार स्थापित करने के बाद मूल निवासियों को अपने पारंपरिक क्षेत्रों से हटना पड़ा। इससे उनका सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक जीवन गहराई से प्रभावित हुआ।
विस्थापन के प्रारम्भिक कारण
- भूमि पर यूरोपीय कब्जा।
- उपनिवेशों का विस्तार।
- कृषि एवं पशुपालन का विकास।
- खनन गतिविधियों में वृद्धि।
- प्राकृतिक संसाधनों का दोहन।
उपनिवेशिक विस्तार : सत्रहवीं सदी के बाद स्पेन और पुर्तगाल के अमरीकी साम्राज्य का विस्तार नहीं हुआ | फ्रांस, होलैंड और इंग्लैंड जैसे देशों ने अपनी व्यापारिक गतिविधियों का विस्तार करना और अमरीका, अफ्रीका तथा एशिया में अपने उपनिवेश बसाना शुरू कर दिया |
स्पेनी और पुर्तगालियों का प्रवास : स्पेनी और पुर्तगाली लोग 18वीं सदी में अमरीका के और भी हिस्सों में, तथा मध्य, उत्तरी अमरीका, दक्षिणी अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया तथा न्यूजीलैंड के इलाकों में यूरोप से आए आप्रवासी बसने लगे। इस प्रक्रिया ने वहाँ के बहुत से मूल निवासियों को दूसरे इलाकों में जाने पर मजबूर किया।
कॉलोनी : 17 वीं सदी में यूरोपीय लोग दुसरे महादेशों में अपना प्रवास स्थापित किया | यूरोपीय लोगों की ऐसी बस्तियों को ‘कॉलोनी’ (उपनिवेश) कहा जाता था।
उपनिवेशों को देश का दर्जा : जब यूरोप से आए इन उपनिवेशों के बाशिंदे यूरोपीय ‘मातृदेश’ से स्वतंत्र हो गए, तो उन्हें ‘राज्य’ या देश का दर्जा हासिल हो गया।
मूल निवासियों का अपने इतिहास की जानकारी : बीसवीं सदी के मध्य तक अमरीका और ऑस्ट्रेलिया की इतिहास की पाठ्यपुस्तकों में यह बताया जाता था कि किस तरह यूरोपवासियों ने उत्तरी और दक्षिणी अमरीका तथा ऑस्ट्रेलिया की ‘खोज’ की। उनमें यहाँ के मूल बाशिंदों का शायद ही कभी जि़क्र होता था, सिवाय यह बताने के कि यूरोपीय लोगों के प्रति उनका रवैया शत्रुतापूर्ण था। पर 1840 के दशक से ही अमरीका में मानवविज्ञानियों ने उन पर अध्ययन आरंभ कर दिया था। बहुत बाद में, 1960 के दशक से, इन मूल निवासियों को अपने इतिहास को लिखने या बयान करने (मौखिक इतिहास) के लिए प्रेरित किया गया।
इतिहास और कलाकृतियों के लिए संग्रहालय : इन देशों में जानेवाले लोग वहाँ के संग्रहालयों में ‘देसी कला’ की दीर्घाएँ तथा आदिवासी जीवन-शैली को दिखलानेवाले विशेष संग्रहालय भी देख सकते हैं। संयुक्त राज्य अमरीका में नया अमरीकी इंडियन राष्ट्रीय संग्रहालय खुद अमरीकी इंडियनों की देख-रेख में बना है।
18वीं सदी में उपनिवेश बसाने का कारण : अमेरिका, अफ्रीका और एशिया में यूरोपीय लोग यहाँ कुछ तो खोज और कुछ व्यापार स्थापित के उद्देश्य से आए थे | परन्तु इन देशों को उपनिवेश बसाने के पीछे मुनाफे की संभावना ही थी | इन देशों की प्रकृति में महत्वपूर्ण विविधताएँ थी | धातु, लकड़ी मसाले, कपडे और अनाज जैसी संसाधनों से पूर्ण थी |
उपनिवेश स्थापित करने के लिए उठाये गए कदम :
(i) व्यापारिक कंपनियों ने अपने को राजनीतिक सत्ता का रूप दिया |
(ii) स्थानीय शासकों को हराया और अपने इलाके का विस्तार किया।
(iii) उन्होंने पुरानी सुविकसित प्रशासकीय व्यवस्था को जारी रखा और भूस्वामियों से कर वसूलते रहे।
(iv) बाद में उन्होंने व्यापार को सुगम बनाने के लिए रेलवे का निर्माण किया, खदानें खुदवाईं और बड़े-बड़े बगान स्थापित किए |
उतरी अमेरिका भौगोलिक स्थिति : उत्तरी अमरीका का महाद्वीप उत्तरध्रुवीय वृत्त से लेकर कर्क रेखा तक और प्रशांत महासागर से अटलांटिक महासागर तक फैला है। पथरीले पहाड़ों की श्रृंखला के पश्चिम में अरिज़ोना और नेवाडा की मरुभूमि है। थोड़ा और पश्चिम में सिएरा नेवाडा पर्वत हैं। पूरब में ग्रेट (विस्तृत) मैदानी इलाके, ग्रेट (विस्तृत) झीलें, मिसीसिपी और ओहियो और अप्पालाचियाँ पर्वतों की घाटियाँ हैं। दक्षिण दिशा में मेक्सिको है। कनाडा का 40 फीसदी इलाका जंगलों से ढँका है।
उतरी अमरीका के खनिज संसाधन : उतरी अमरीका के कई क्षेत्रों में तेल, गैस और खनिज संसाधन पाए जाते हैं | जिसके कारण संयुक्त राज्य अमरीका और कनाडा में ढेरों बड़े उद्योग हैं |
कृषि : कनाडा में गेहूँ, मकई और फल बड़े पैमाने पर पैदा किए जाते हैं और मत्स्य-उद्योग वहाँ का एक महत्त्वपूर्ण उद्योग है।
मूल निवासी : किसी स्थान के मूल आदिवासी या जानजातीय लोगों को मूल निवासी कहा जाता है | जो अपने मौजूदा निवास-स्थान में पैदा हुआ था और उसके पूर्वज भी उसी स्थान के बाशिंदे थे |
मूल निवासियों का रहन-सहन और खान-पान :
ये लोग नदी घाटी के साथ-साथ बने गाँवों में समूह बना कर रहते थे। वे मछली और मांस खाते थे, और सब्जि़्ायाँ तथा मकई उगाते थे। वे अक़्सर मांस की तलाश में लंबी यात्राओं पर जाया करते थे। मुख्य रूप से उन्हें ‘बाइसन’ यानी उन जंगली भैंसों की तलाश रहती थी, जो घास के मैदानों में घूमते थे। वे घोड़े स्पेनी आबादकारों से ख़रीदते थे। लेकिन वे उतने ही जानवर मारते, जितने की उन्हें भोजन के लिए ज़रूरत होती थी।
मूल निवासियों के परंपरा की विशेषताएँ :
(i) उनके पास जमीन पर नियंत्रण का कोई मुद्दा नहीं था |
(ii) वे जमीन पर अपनी मिलकियत की कोई जरूरत महसूस नहीं करते थे और उससे मिलने वाले भोजन से संतुष्ट थे |
(iii) औपचारिक संबंध और दोस्तियाँ कायम करना तथा उपहारों का आदान-प्रदान करना।
(iv) चीजें उन्हें ख़रीदने की बजाय उपहार के तौर पर हासिल होती थीं।
होपी समुदाय : कैलिफोर्निया के निकट रहने वाले आदिवासी हैं।
अमरीकी और यूरोप वासियों के बीच वस्तुओं का आदान-प्रदान :
(i) हस्तशिल्पों का आदान-प्रदान जो किसी खास कबीलें में ही बनते थे |
(ii) ऐसे खाद्य पदार्थों का आदान-प्रदान जो अन्य इलाकों में उपलब्ध नहीं थे।
(iii) यूरोपीय लोग स्थानीय लोगों को कंबल, लोहे के बर्तन, शिकार के लिए बंदूकें और शराब देते थे |
यूरोपीय लोगों की अन्य निवासियों के प्रति धारणाएँ :
(i) अठारहवीं सदी में पश्चिमी यूरोप के लोग ‘सभ्य’ मनुष्य की पहचान साक्षरता, संगठित धर्म
और शहरीपन के आधार पर ही करते थे। उन्हें अमरीका के मूल निवासी ‘असभ्य’ प्रतीत हुए।
अमरीका के मूल निवासियों के लिए फ्रांसिसी दार्शनिक ज्यां जैक रूसों के विचार :
उनका कहना था कि "ऐसे लोग तारीफ के काबिल थे, क्योंकि वे ‘सभ्यता’ की विकृतियों से अछूते थे।"
अमरीकी मूल निवासियों के लिए विर्ड्सवर्थ के विचार :
वर्ड्सवर्थ ने उनका वर्णन करते हुए कहा कि वे ‘‘जंगलों में’’ रहते हैं, ‘‘जहाँ कल्पनाशक्ति के पास उन्हें भावसंपन्न करने, उन्हें ऊँचा उठाने या परिष्कृत करने के अवसर बहुत कम हैं’’, जिसका मतलब यह कि प्रकृति के निकट रहनेवालों की कल्पनाशक्ति और भावना अत्यंत सीमित होती है !
19वीं सदी में अमरीका के भूदृश्य में बदलाव :