Your Complete CBSE Learning Hub

Free NCERT Solutions, Revision Notes & Practice Questions

Notes | Solutions | PYQs | Sample Papers — All in One Place

Get free NCERT solutions, CBSE notes, sample papers and previous year question papers for Class 6 to 12 in Hindi and English medium.

Advertise:

Chapter 5. विधायिका Class 11 Political Science CBSE notes in hindi केन्द्रीय विधायिका - CBSE Study

Chapter 5. विधायिका Political Science Class 11 cbse notes केन्द्रीय विधायिका in hindi, all chapters and exercises are covered the ncert latest syllabus 2026 - 27.

• Hi Guest! • LoginRegister

Class 6

CBSE Notes

Class 7

CBSE Notes

Class 8

CBSE Notes

Class 9

CBSE Notes

Class 10

CBSE Notes

Class 11

CBSE Notes

Class 12

CBSE Notes

Chapter 5. विधायिका Class 11 Political Science CBSE notes in hindi केन्द्रीय विधायिका - CBSE Study

कक्षा 11 Political Science के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण 5. विधायिका को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक केन्द्रीय विधायिका को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन Political Science में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।

Class 11 English Medium Political Science All Chapters:

5. विधायिका

1. केन्द्रीय विधायिका

Page 1 of 3

विधायिका:

लोकतान्त्रिक देशों में विधानमंडल कानून बनाने वाला एक प्रमुख अंग है | जो जनता का प्रतिनिधित्व करता है | यह संसदीय कार्य-प्रणाली के  अंतर्गत कार्य करता है | विधानमंडल दो स्तरों पर कार्य करता है | 

(i) केन्द्रीय संसद और 

(ii) राज्य विधानमंडल 

संसद की हमें क्या आवश्यकता है ? अथवा संसद का कार्य : 

संसद की हमें निम्न कारणों से आवश्यकता है | 

(i) विधि-निर्माण या कानून बनाना विधानमंडल का एक प्रमुख कार्य है | यह देश के लिए नए कानून को बनाता है और पुराने कानूनों में संसोधन करता है अथवा उसे निरस्त करता  है | 

(ii) वित्तीय कार्य - विधानमंडल वित्तीय कार्यों का देखभाल करता है यह राष्ट्रिय खजाने की अभिरक्षक भी है | इनकी स्वीकृति के बिना कोई नया कर लगाया नहीं जाता और संचित खजाने के आधार पर ये नए वित्तीय योजनाएँ बनाते हैं | 

(iii) ये कार्यपालिका पर भी नियंत्रण रखते है और महत्वपूर्ण मामलों में कार्यपालिका को विधानमंडल से स्वीकृति के बाद ही कार्य करना होता है | 

(iv) जनता के शिकायतों को विधानमंडल के द्वारा ही प्रकाश में लाया जाता है | ये वाद-विवाद अथवा बहस के द्वारा शिकायतों पर प्रकाश डालते हैं | 

(v) संसद भारत के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का  चुनाव करती है | 

(vi) संसद के पास न्यायिक कार्य भी है जैसे भारत के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति तथा उच्च और सर्वोच्य न्यायलय के न्याधिशों को पद से हटाने के प्रस्तावों पर विचार करने के कार्य करती है | 

विधायिका दो प्रकार के हैं |

(1) केंद्र में संसद 

(2) राज्य में राज्य  विधानमंडल 

भारतीय संसद के दो भाग है |

(1) लोकसभा : भारतीय संसद के अस्थायी सदन को लोक सभा कहते है | जिसका कार्यकाल 5 वर्ष का होता है और इसके 542 सदस्य चुने जाते है | 

(2) राज्यसभा : भारतीय संसद के अन्य सदन जो स्थायी होता है राज्यसभा कहते है  | इसके सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष होता है | 

संसद में दो सदनों  की आवश्यकता : 

(i) विविधताओं से पूर्ण देश प्राय: द्वि-सदनात्मक राष्ट्रिय विधायिका चाहते है ताकि समाज के सभी वर्गों को  उचित प्रतिनिधित्व दिया जा सके |

(ii) इसका एक अन्य लाभ यह है कि एक सदन द्वारा लिए गए प्रत्येक निर्णय पर दुसरे सदन में पुनर्विचार हो जाता  है | 

(iii) प्रत्येक विधेयक और निति पर दो  बार  विचार  होता है | 

(iv) एक सदन कोई भी निर्णय जल्दबाजी में थोप नहीं पाता है |

द्वि-सदनात्मक विधायिका वाले प्रान्त: 

(i) बिहार 

(ii) जम्मू और कश्मीर 

(iii) उत्तर-प्रदेश 

(iv) महाराष्ट्र

(v) कर्नाटक 

राज्यसभा :

राज्यसभा राज्यों का प्रतिनिधित्व करती है | इसे संसद का उपरी सदन भी कहते है जो एक स्थायी सदन होता है | यह सदन कभी भंग नहीं होता है | इसका निर्वाचन अप्रत्यक्ष विधि से होता है | 

राज्य सभा के सदस्यों का चुनाव: राज्य सभा के सदस्यों का चुनाव एकल संक्रमणीय मत प्रणाली के द्वारा होता है जिसमें किसी राज्य के लोग राज्य की विधानसभा के सदस्य को चुनते है और फिर राज्य विधानसभा के सदस्य राज्यसभा के सदस्य को चुनते हैं | अत: यह चुनाव अप्रत्यक्ष होता है | 

राज्यसभा में प्रतिनिधित्व के लिए दो सिद्धांत: 

(i) देश के सभी क्षेत्रों को असमान आकार और जनसंख्या के बावजूद द्वितीय सदन में प्रतिनिधित्व दिया जाये |

(ii) देश के विभिन्न क्षेत्रों को उनके जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व  दिया जाये |

राज्यसभा के सदस्य और उनका कार्यकाल : 

राज्यसभा के सदस्यों को 6 वर्ष के लिए चूना जाता है | प्रत्येक दो वर्ष पर राज्य सभा के एक तिहाई सदस्य अपना कार्यकाल पूरा करते है और इन्ही एक तिहाई सदस्यों के लिए चुनाव  होते हैं | इस प्रकार राज्य  सभा कभी भी पूरी तरह भंग नहीं होती है | यही कारण है कि इसे संसद के स्थायी सदन के रूप में जाना  जाता है | 

राज्य सभा के मनोनीत सदस्य : राज्य सभा में निर्वाचित सदस्यों के अतिरिक्त 12 मनोनीत सदस्य भी होते है | देश के वे लोग जो साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा के क्षेत्र में विशेष उपलब्धि हासिल की हो उन्हें राष्ट्रपति द्वारा राज्य  सभा सदस्य मनोनीत किया जाता है | राज्यसभा के 245 सदस्यों में से12 मनोनीत सदस्य होते हैं | 

राज्यसभा की शक्तियाँ : 

(a) समान्य विधेयकों पर विचार कर उन्हें पारित करती है और धन विधेयकों में संशोधन प्रस्तावित करती है | 

(b) संवैधानिक संशोधनों को पारित करती है | 

(c) प्रश्न पूछ कर तथा संकल्प और प्रस्ताव प्रस्तुत करके कार्यपालिका पर नियंत्रण करती है | 

(d) राष्ट्रपति  और उपराष्ट्रपति के चुनाव में भाग लेती है और उन्हें और सर्वोच्य न्यायलय के न्यायधीशों को हटा सकती है |

(e) उपराष्ट्रपति को हटाने का प्रस्ताव केवल राज्यसभा में ही लाया जा सकता है |

(f) यह संसद को राज्य सूची के विषयों पर कानून बनाने का अधिकार दे सकती है |  

(g) यह राज्यों की हितों (शक्तियों ) की रक्षा करती है | 

लोकसभा:

लोकसभा के सदस्य प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा चुने जाते हैं | लोकसभा चुनावों के लिए पुरे देश को निर्वाचन क्षेत्रों में बाँट दिया जाता है | और प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र के लिए एक प्रतिनिधि चुना जाता है जिसे सांसद (Member of parliyament) कहा जाता है | इस समय लोक सभा के 543 निर्वाचन क्षेत्र हैं | इन निर्वाचन क्षेत्रों को संसदीय क्षेत्र भी कहा जाता है | 

लोकसभा सदस्यों का चुनाव: लोकसभा चुनाव सार्वभौमिक व्यस्क मताधिकार के आधार पर होता है | प्रत्येक मत (वोट) का मूल्य समान होता है | लोकसभा के सदस्यों को 5 वर्ष के लिए चुना जाता है |

लोकसभा भंग की प्रक्रिया : लोकसभा चुनाव के बाद यदि किसी भी दल को बहुमत प्राप्त नहीं हुआ है अथवा कोई भी दल सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है तो राष्ट्रपति सबसे बड़े दल को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करता है और उसे कुछ दिनों में बहुमत सिद्ध करने के लिए कहता है | यदि उस दल का नेता (प्रधानमंत्री) बहुमत सिद्ध नहीं कर पाता है तो उसे इस्तीफा देना पड़ता है और वह राष्ट्रपति से लोकसभा भंग करने की सिफारिश कर सकता है | लोकसभा को 5 वर्ष पूर्ण होने से पहले ही भंग किया जा सकता है |  

लोकसभा की शक्तियाँ : 

(a) संध सूची और समवर्ती सूची के विषयों पर कानून बनाती है | धन विधेयकों और समान्य विधेयकों को प्रस्तुत और पारित करती है |

(b) कर-प्रस्तावों, बजट और वार्षिक वित्तीय वक्तव्यों को स्वीकृति देती है | 

(c) प्रश्न पूछ, पूरक प्रश्न पूछ कर, प्रस्ताव लाकर और अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से कार्यपालिका को नियंत्रण करती है | 

(d) लोकसभा संविधान में संशोधन का कार्य करती है | 

(e) आपातकाल की घोषणा को स्वीकृति देती है | 

(f) राष्ट्रपति  और उपराष्ट्रपति का चुनाव करती है और उन्हें और सर्वोच्य न्यायलय के न्यायधीशों को हटा सकती है |

(g) समिति और आयोगों का गठन करती है और उनके प्रतिवेदन पर विचार करती है | 

(h) धन विधेयक केवल लोकसभा में में ही प्रस्तुत किये जा सकते है | 

  • लोकसभा के पास राज्यसभा से अधिक शक्तियाँ है : 
  • राज्यसभा को जनता नहीं बल्कि विधायक चुनते है |
  • संविधान द्वारा अपनायी गई लोकतान्त्रिक व्यवस्था में जनता के पास अंतिम शक्ति होती है | 
  • यही कारण है कि संविधान ने निर्वाचित प्रतिनिधियों (लोकसभा ) के पास ही सरकार को हटाने और वित् पर नियंत्रण रखने की शक्ति दी है | 
Page 1 of 3

Topic Lists Page Wise:

Disclaimer:

This website's domain name has included word "CBSE" but here we clearly declare that we and our website have neither any relation to CBSE and nor affliated to CBSE organisation.