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Chapter 4. कार्यपालिका Class 11 Political Science CBSE notes in hindi कार्यपालिका और संसदीय प्रणाली - CBSE Study

Chapter 4. कार्यपालिका Political Science Class 11 cbse notes कार्यपालिका और संसदीय प्रणाली in hindi, all chapters and exercises are covered the ncert latest syllabus 2026 - 27.

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Chapter 4. कार्यपालिका Class 11 Political Science CBSE notes in hindi कार्यपालिका और संसदीय प्रणाली - CBSE Study

कक्षा 11 Political Science के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण 4. कार्यपालिका को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक कार्यपालिका और संसदीय प्रणाली को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन Political Science में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।

Class 11 English Medium Political Science All Chapters:

4. कार्यपालिका

1. कार्यपालिका और संसदीय प्रणाली

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कार्यपालिका: 

कार्यपालिका सरकार का वह अंग है, जो विधानमंडल द्वारा बनाये कानूनों एवं नियमों को क्रियान्वित करता है | कार्यपालिका का प्रमुख राज्य का अध्यक्ष होता है जैसे - राष्ट्रपति एवं राज्यपाल कार्यपालिका के अंतर्गत सभी मंत्री एवं नौकरशाह शामिल हैं |

कार्यपालिका के कार्य: 

(1) सरकार की नीतियों को लागु करना एवं विधायी निकायों द्वारा बनाये गए कानूनों को अमल में लाना |

(2) कार्यपालिका कानून निर्माण प्रक्रिया में सरकार की सहायता करता है |  

(3) कार्यपालिका राज्यों के साथ संबंधो का संचालन करता है |

(4) विभिन प्रकार के संधियों एवं समझौतों का निष्पादन करता है |

(5) सभी देशों में राज्य का अध्यक्ष देश की सशस्त्र सेना का सर्वोच्य कमांडर होता है परंतु वह किसी युध्य में भाग नहीं लेता है |

कार्यपालिका के प्रकार : 

1. संसदीय सरकार - संसदीय प्रणाली वाले देशों में कार्यपालिका का कार्य राजा या राष्ट्रपति के नाम से किया जाता है किन्तु उनकी शक्तियाँ केवल नाममात्र की होती है | वे औपचारिक रूप से कार्य करते हैं | वास्तविक कार्यपालिका मंत्री परिषद् होता है जो राजा या राष्ट्रपति के नाम पर शासन चलाते है | उदाहरण - ब्रिटेन, भारत, कनाडा और जापान | 

2. अध्यक्षीय सरकार - अध्यक्षीय प्रणाली में राष्ट्रपति ही वास्तविक शक्तियों का प्रयोग करता है | ऐसे देशों में जहाँ अध्यक्षीय प्रणाली कार्य कर रही है वहाँ सचिव या मंत्रीगण राष्ट्रपति के सलाहकार मात्र होते हैं | केवल राष्ट्रपति ही केन्द्रीय प्रशासन के उतरदायी होता है | जैसे - संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्राजील, पेरू, कोस्टारिका आदि | 

3. अर्ध-अध्यक्षीय प्रणाली - अर्ध-अध्यक्षीय प्रणाली संसदीय और अध्यक्षीय दोनों प्रणालियों के संयोजन से बना है | रूस, फ्रांस और श्रीलंका में ये प्रणाली कार्य कर रही है | इसमें प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित राष्ट्रपति के पास व्यापक शक्तियाँ होती है | वह प्रधान-मंत्री की नियुक्ति करता है जो संसद से लिया जाता है | दोनों के बीच शक्ति का संतुलन होता है | 

संसदीय प्रणाली और अध्यक्षीय प्रणाली में अंतर : 

 संसदीय प्रणाली   अध्यक्षीय प्रणाली 

 1. प्रधान-मंत्री और उसके सहयोगी वास्तविक कार्यपालिका की रचना करते है | 

 2. प्रधान-मंत्री और उसके मंत्रीगण विधानमंडल के सदस्य होते हैं | 

 3. मंत्रिपरिषद विधानमंडल के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होते हैं | 

 4. निचला सदन (लोकसभा) को कभी भी राष्ट्रपति द्वारा भंग किया जा सकता है | 

 5. मंत्रिमंडल को किसी भी समय सदन के अविश्वास प्रस्ताव द्वारा हटाया जा सकता  है | 

 1. राष्ट्रपति कार्यपालिका का वास्तविक अध्यक्ष होता है | 

 2. मंत्री विधानमंडल के सदस्य नहीं होते है | 

 3. मंत्रिमंडल के सदस्य विधानमंडल के प्रति उतरदायी नहीं होते हैं |

 4. राष्ट्रपति किसी भी सदन को भंग नहीं कर सकता है |  

 5. विधानमंडल को मंत्रिमंडल में अविश्वास प्रस्ताव पारित करने का कोई अधिकार नहीं हैं | 

भारत की ससदीय प्रणाली की कमियां - इसमें त्रिशंकु लोकसभा की संभावना बनी रहती है | इसका कारण भारत में बहुदलीय प्रणाली का होना है | जिसमें कई बार किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है | इससे राजनितिक अस्थिरता भी कहा जाता है | 

भारत में संसदीय प्रणाली के अपनाने के कारण : 

(1) यदि सीधे तौर पर राष्ट्रपति को चूना जाता तो वह बहुत शक्तिशाली बन जाता और फिर वह तानाशाह या निरंकुश भी बन सकता है | 

(2) भारत जैसे विशाल देश में राष्ट्रपति का सीधे चुनाव से काफी अव्यवस्था उत्पन्न होगी | 

(3) भारतीय राजनेताओं को ब्रिटिश राजनितिक प्रणाली का अधिक  अनुभव था और वे उससे प्रभावित थे | 

(4) यह प्रणाली कठिन समय में सफल रही है और इसमें कोई हानि नहीं है | 

 

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