Chapter 3. आँकड़ों का व्यवस्थितिकरण Class 11 Economics CBSE notes in hindi चर की अवधारणा - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 11 English Medium Economics All Chapters:
3. आँकड़ों का व्यवस्थितिकरण
1. चर की अवधारणा
आँकड़ों का व्यवस्थीकरण तभी संभव है जब उन्हें उनके विशेषताओं के आधार पर वर्गीकृत किया जाये |
आँकड़ों का वर्गीकरण : वह प्रक्रिया जिसके द्वारा आँकड़ों को उनकी समानता और असमानता के आधार पर विभिन्न वर्गों में विभाजन किया जाता है, वर्गीकरण कहलाता है |
वर्गीकरण के उदेश्य :
(i) आँकड़ों को सरल एवं संक्षिप्त बनाना |
(ii) आँकड़ों की समरूपता को प्रकट करके उनकी उपयोगिता को बढ़ाना |
(iii) आँकड़ों को विभेदकारी बनाना ताकि उनके विशिष्ट अंतर को समझा जा सके |
(iv) आँकड़ों को तुलना योग्य या अनुमान योग्य बनाना |
(v) वैज्ञानिक आधार प्रदान करना ताकि उनकी विश्वसनीयता बढे |
(vi) आकर्षक और प्रभावशाली बनाना |
आँकड़ों का वर्गीकरण का आधार :
(i) भौगोलिक आधार पर
(ii) समयानुसार वर्गीकरण
(iii) गुणात्मक वर्गीकरण
(a) साधारण वर्गीकरण
(b) बहुगुणी वर्गीकरण
(iv) मात्रात्मक या संख्यात्मक वर्गीकरण
चर की अवधारणा -
किसी तथ्य की वह विशेषता या प्रक्रिया जिसे संख्याओं के रूप में मापा जा सकता है | चर कहलाती है |
चर दो प्रकार के होते है |
(i) विविक्त या खंडित चर: इनके मान पूर्णांक में होते है, भिन्नात्मक नहीं होते है |
क्रिकेट देखने वालों की उम्र (वर्ष में ) : 23, 24, 30, 32, 38, 40. ...... इत्यादि |
(ii) अखंडित चर : इनका मान भिन्नात्मक होते है |
जैसे : ग्यारहवी के 10 विद्याथियों की लम्बाई : 5'1", 5'2", 4'8", 4'9", 5'3", 5'5"...... इत्यादि |
शुद्ध आँकडे : वे आँकडे जिन्हें एक अनुसंधान कर्ता अपने अनुसंधान के दौरान संकलित करता है, जो अव्यवस्थित रूप में होते है, शुद्ध आंकड़े कहलाते है |